कल का चौघड़िया
kal ka choghadiya 2025

21 मार्च 2025
का चौघड़िया

कल का चौघड़िया क्या है

kal ka choghadiya
21 मार्च 2025

kal ka choghadiya
दिन का चौघड़िया

चरसुबह 06:31 – सुबह  08:02शुभ
लाभ सुबह 08:02 – सुबह 09:33शुभ
अमृतसुबह 09:33 – सुबह 11:03शुभ
 कालसुबह 11:03 – दोपहर 12:34अशुभ
शुभदोपहर 12:34 – दोपहर 02:05शुभ
 रोगदोपहर 02:05 – दोपहर 03:36अशुभ
 उद्बेग दोपहर 03:36 – शाम 05:07अशुभ
 चरशाम 05:07 – शाम 06:37शुभ

kal ka choghadiya
रात का चौघड़िया

रोगशाम 06:37 – 08:06अशुभ 
कालरात 08:06 – 09:35अशुभ 
लाभ रात 09:35 -11:05शुभ 
उद्बेग रात 11:05 -12:34अशुभ22 मार्च
शुभरात 12:34- 02:03शुभ22 मार्च
अमृतरात 02:03 -03:32शुभ22 मार्च
 चरप्रात: 03:32 – 05:01शुभ22 मार्च
रोगप्रात:05:01 – 06:30अशुभ22 मार्च
kal ka choghadiya
चौघड़िया: शुभ समय का गणित और महत्व

भारतीय संस्कृति में शुभ समय का निर्धारण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। जब भी कोई नया काम शुरू करना हो, यात्रा पर जाना हो, व्यापार का आरंभ करना हो, या किसी धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन करना हो, तो शुभ समय का चयन आवश्यक माना जाता है। शुभ समय का निर्धारण करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कई विधियाँ अपनाई जाती हैं। इनमें से एक प्रमुख विधि है चौघड़िया। यह प्राचीन भारतीय पद्धति दिन और रात को समय के अनुसार शुभ और अशुभ घड़ियों में विभाजित करती है।

kal ka choghadiya
चौघड़िया का अर्थ और स्वरूप

‘चौघड़िया’ शब्द दो भागों में विभाजित है—’चौ’ यानी चार और ‘घड़ी’ यानी समय का भाग। प्राचीन भारतीय समय प्रणाली में एक दिन को आठ प्रहरों में बांटा गया था। हर प्रहर को चौघड़िया में चार भागों में विभाजित किया गया, जिनमें प्रत्येक भाग लगभग 1 घंटा 30 मिनट का होता है। इस प्रकार चौघड़िया में दिन और रात को कुल आठ भागों में विभाजित किया जाता है।

kal ka choghadiya
चौघड़िया श्रेणियाँ इस प्रकार हैं

चौघड़िया को शुभ, मध्यम और अशुभ श्रेणियों में बांटा गया है। ये श्रेणियाँ इस प्रकार हैं:

  • अमृत चौघड़िया: सबसे शुभ समय।
  • शुभ चौघड़िया: अच्छा और लाभकारी समय।
  • लाभ चौघड़िया: कार्य में सफलता और उन्नति का समय।
  • चर चौघड़िया: यात्रा और स्थान परिवर्तन के लिए अनुकूल।
  • रोग चौघड़िया: स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सूचक।
  • काल चौघड़िया: अशुभ और नकारात्मक समय।
  • उद्वेग चौघड़िया: परेशानियों और विघ्न का समय।
kal ka choghadiya
चौघड़िया का उपयोग

चौघड़िया का उपयोग दिन और रात में शुभ कार्यों के लिए किया जाता है। इसे दिन के चौघड़िया और रात के चौघड़िया के रूप में विभाजित किया गया है।

  • दिन का चौघड़िया सूर्योदय से आरंभ होता है और सूर्यास्त तक चलता है।
  • रात का चौघड़िया सूर्यास्त के बाद शुरू होता है और अगले सूर्योदय तक रहता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के आधार पर चौघड़िया का निर्धारण होता है। इसमें स्थानीय समय को ध्यान में रखते हुए गणना की जाती है।

चौघड़िया हिंदू ज्योतिष में समय को शुभ और अशुभ खंडों में विभाजित करने का एक प्राचीन पद्धति है। इसका उपयोग मुख्यतः शुभ कार्यों के लिए सही समय चुनने में किया जाता है। चौघड़िया को दिन और रात में सात भागों में विभाजित किया गया है, और प्रत्येक भाग लगभग 1 घंटा 45 मिनट का होता है। ये खंड दिन और रात के अनुसार बदलते रहते हैं।

कल का चौघड़िया
चौघड़िया के सात प्रकार होते हैं:

चौघड़िया के सात प्रकार होते हैं: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल और रोग। इनमें से अमृत, शुभ और लाभ को अत्यंत शुभ माना जाता है। इन समयों में कोई भी नया कार्य शुरू करना सफल माना जाता है। चर चौघड़िया यात्रा या आंदोलन के लिए अच्छा होता है, जबकि उद्वेग, काल और रोग को अशुभ माना जाता है। इन अशुभ समयों में महत्वपूर्ण कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

चौघड़िया का उपयोग विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार शुरू करने, यात्रा, पूजा और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए सही समय तय करने में किया जाता है। यदि किसी कारणवश शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो, तो चौघड़िया देखकर कार्य करने की परंपरा है।

दिन के चौघड़िया का आरंभ सूर्योदय से और रात के चौघड़िया का आरंभ सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक दिन का चौघड़िया भिन्न होता है, और इसे पंचांग या चौघड़िया तालिका के माध्यम से देखा जा सकता है।

चौघड़िया का उपयोग सरल और प्रभावी है। इसे देखकर कार्य करने से सकारात्मक ऊर्जा और सफलता की संभावना बढ़ जाती है। यह परंपरा समय और कार्य के बीच सामंजस्य बैठाने का एक महत्वपूर्ण साधन है, जो आज भी प्रासंगिक है।

कल का चौघड़िया
उपसंहार

चौघड़िया भारतीय ज्योतिष का एक अभिन्न हिस्सा है, जो लोगों को सही समय पर सही कार्य करने की प्रेरणा देता है। इसका पालन करने से कार्यों में सफलता, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि चौघड़िया के साथ-साथ व्यक्ति की निष्ठा, परिश्रम और संकल्प भी सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

चौघड़िया न केवल धार्मिक और सामाजिक संदर्भ में उपयोगी है, बल्कि आधुनिक जीवन में भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है। यह हमें समय का मूल्य समझने और जीवन में संतुलन बनाए रखने की शिक्षा देता है।